समय तेजी से बदल रहा है, देश-दुनिया और तेजी से बदल रही है, ईराक में आई एस- आई एस तेजी से पाँव पसार रहा है, भारत में १९९२ जैसा राष्ट्रवाद, विकराल रूप ले रहा है|

मेरे कहने का मतलब क्या निकाला जायेगा, ये कोई नहीं जानता???

इसलिये यह बता देना आवश्यक समझता हूँ कि मेरी दृष्टि में आर.एस.एस. कोई भगवा आतंकवादी संगठन कदापि नहीं है|

परन्तु मुझे यह कहने में भी कोई गुरेज नहीं है, कि इस संगठन ने भी कई बदनाम मुस्लिम मदरसों की तरह, हिन्दुत्व के सर्वधर्म समभाव की भावना को भोथरा करने का प्रयास अवश्य किया है|

संघ के मानने वाले लोगों ने जहाँ एक ओर समाज सेवा के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किये हैं, वहीं दूसरी ओर धर्म और राष्ट्रवाद में अतिवादिता की जो विषबेल बोने का काम किया, उसी का परिणाम है कि नाथूराम गोडसे ने देश के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या की, और आज भी उसके आनुषांगिक संगठन, उसी राष्ट्रपिता के हत्यारोपी को राष्ट्रभक्त सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं|

यह आर.एस.एस. के दुष्प्रचार का परिणाम है, कि महात्मा गाँधी, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत तक में कभी भी अन्याय के सामने शीश नहीं झुकाया, और पूरे विश्व को अहिंसक युद्ध की कला सिखला दी, उनके विरुद्ध यह नारा प्रचारित कर दिया— मजबूरी का नाम, महात्मा गाँधी|

जो लोग संघ की विचारधारा से परिचित हैं, वे जानते हैं कि संघ से जुड़े लोग महात्मा गाँधी के विरुद्ध विषवमन करते हैं| यह कोई छिपी हुई बात नहीं है|

जहाँ मुझे यह कहने में भी फक्र महसूस होता है, कि हमारे देश में, सहिष्णु हिन्दुओं की संख्या करोड़ों मे है| चंद सिरफिरों की मौजूदगी या अभद्रता, पूरे देश के माथे पर असहिष्णु होने का कलंक नहीं लगा सकती|

ठीक उसी तरह जैसे चंद ओवैसी जैसे नेता, या भाजपा के साक्षी महाराज, आदित्यनाथ जैसे लोग हिन्दू या मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि नहीं माने जा सकते हैं|

भारतीय जनता पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व, समाज में असहिष्णुता की भावना को प्रसारित करने वाले विधायकों, सांसदों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के इन शाब्दिक विषबाण छोड़ने की मनचाही अघोषित स्वतंत्रता दे रखी है, परिणाम सामने है कि देश के जाने-माने साहित्यकारों, कलाकारों ने विरोध में पुरस्कार वापस किये| जिसे सरकार द्वारा कांग्रेस और वामपंथी दलों का समर्थक बता कर, इतनी बड़ी संख्या के विरोध को दबाने, और समर्थकों, विषवमन करने वालों के हौसले बुलन्द करने का प्रयास किया गया|

इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि देश के भीतर, मुस्लिम समाज के नवयुवकों ने भी, मुस्लिम बहुसंख्यक इलाकों को मिनी पाकिस्तान, या पाकिस्तानपरस्ती का रंग दे रखा है, जहाँ पर घुसने वाले हिन्दू पुरुष और महिलायें, अपने आप को सुरक्षित नहीं पाती हैं, अायें दिन अनेक अभद्रता की घटनायें होती हैं, जिस कारण हिन्दू समाज उद्द्वेलित होकर, संघ की ओर मुड़ जाता है| संघ वहाँ पर बैलेंसिग फैक्टर की तरह काम करता है|

देश में कानून का राज यदि ठीक हो जाये, पुलिस अपने कर्तव्य और उत्तरदायित्व का ठीक से वहन करे, नेता अपने नैतिक मनोबल को दृढ़ करें और जाति, धर्म, सम्प्रदाय की संकीर्णताओं और वोटबैंक की राजनीति को छोड़ कर, समाज, देशहित में कार्य करें, तो इन स्थानीय समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है|

अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मानसिकता, भय, अराजकता और उन्माद को जन्म देती है| ओवैसी, आदित्यनाथ और साक्षी महाराज ऐसे वातावरण की देन हैं| इस प्रतिक्रियावादी साम्प्रदायिक भावना को तिलांजलि देकर ही, हम राष्ट्रीय एकता को मजबूत, और आतंकवाद को कड़ी चुनौती दे सकते हैं|                      
                                              —तेज प्रकाश